अलादीन: राजकुमारी और महल

अलादीन: राजकुमारी और महल


अलादीन राजकुमारी बदरूलबदूर से शादी करता है और चौबीस रत्न जड़ी खिड़कियों वाला महल बनवाता है। आख़िरी खिड़की को पूरा करने में सुल्तान के सारे कारीगर हार जाते हैं।

अलादीन सोने की कढ़ाई वाले कपड़े पहनकर महल पहुँचा। पीछे संगीतकार, सेवक और घंटियों वाली लगाम पहने घोड़े थे। उसने सुल्तान से अच्छे ढंग से बात की। राजकुमारी बदरुलबदूर को वह उस अनजान खज़ाने वाले आदमी से कहीं अच्छा लगा, जिसकी उसने कल्पना की थी।

शादी से पहले अलादीन ने बत्ती रगड़ी।

“सुल्तान के महल के पास हमारा महल बनाओ,” उसने जिन्न से कहा। “संगमरमर, रंगीन पत्थर और सोना लगाना। बड़े कमरे में चौबीस खिड़कियाँ हों। हीरे और माणिक जड़ना, मगर एक खिड़की अधूरी छोड़ना।”

सुबह खाली मैदान में महल खड़ा था। मखमल का रास्ता उसे सुल्तान के दरवाज़े से जोड़ता था। बड़े कमरे की तेईस खिड़कियाँ पकड़े हुए इंद्रधनुष जैसी चमक रही थीं। आख़िरी खिड़की का किनारा सादा था।

सुल्तान हैरान था। उसके जौहरियों ने उसे पूरा करने की बात कही। उन्होंने खज़ाने के सारे रत्न और बड़े घरों से माँगे गहने लगा दिए। कई हफ़्तों बाद भी खिड़की आधी नहीं बनी।

“अपने रत्न वापस ले जाइए,” अलादीन ने कहा।

रात में जिन्न ने किनारा पूरा कर दिया। सुबह सुल्तान पहचान भी नहीं सका कि कौन-सी खिड़की अधूरी थी।

शादी में नगर ढोल, लालटेन और खाने की मेज़ों से भर गया। अलादीन और बदरुलबदूर फूलों की बारिश के बीच निकले। उसकी माँ इतने बड़े कमरों में रहने लगी कि नाश्ते से पहले दो बार रास्ता भूल गई। फिर वह पीछे गद्दियों की लकीर छोड़ने लगी।

अलादीन सुल्तान का भरोसेमंद सेनापति बना। सीमा पर मुसीबत आई तो सैनिकों के साथ गया और लोगों की तालियों के बीच लौटा। वह और राजकुमारी महल के बाग में मेले लगवाते और नगर वालों की बातें सुनते।

पुरानी बत्ती राजकुमारी के कमरे में लकड़ी के पीछे छिपी थी। अलादीन ने उसकी ताक़त नहीं बताई। बदरुलबदूर को वह काली और बेकार चीज़ लगती थी।

अफ़्रीका में जादूगर ने काँसे की मेज़ पर रेत फैलाकर तारे पढ़े। उसे पता चला कि अलादीन गुफा से बचा, बत्ती रखी और महल बनवा लिया।

उसने गुस्से में कटोरा तोड़ दिया। फिर टोकरी में बारह नई ताँबे की बत्तियाँ रखीं, चीन का जहाज़ पकड़ा और पूरे रास्ते गलियों में लगाने वाली पुकार का अभ्यास करता रहा।