अलादीन: पुराने के बदले नए दीये

अलादीन: पुराने के बदले नए दीये


अफ़्रीकी जादूगर नए के बदले पुराना चिराग़ लेकर महल को अफ़्रीका पहुँचा देता है। अलादीन और बदरूलबदूर अँगूठी और नींद की दवा से महल वापस लाते हैं।

अलादीन सुल्तान के साथ शिकार पर गया था। तभी अफ़्रीकी जादूगर राजधानी पहुँचा। वह महल की खिड़कियों के नीचे टोकरी हिलाकर पुकारने लगा।

“पुराने के बदले नए दीये! मैली पुरानी बत्ती के बदले चमकती नई!”

बच्चे ऐसे बेवकूफ़ सौदे वाले व्यापारी के पीछे हँसते हुए चले।

महल में दासी को लकड़ी के पीछे रखी काली बत्ती याद आई। राजकुमारी बदरुलबदूर को उसका राज़ नहीं पता था।

“बदल लाओ,” उसने कहा। “शायद अलादीन इस बदसूरत चीज़ की जगह नई देखकर खुश होगा।”

बत्ती हाथ में आने तक जादूगर ने चेहरा शांत रखा। फिर वह नगर से बाहर भागा, उसे रगड़ा और जिन्न से अलादीन का महल व भीतर के सारे लोगों को अफ़्रीका ले जाने को कहा।

सुबह सुल्तान ने खिड़की से देखा। मैदान खाली था। संगमरमर की एक सीढ़ी भी नहीं बची। उसने अलादीन को पकड़वाया और कहा कि राजकुमारी नहीं लौटी तो उसे मौत मिलेगी।

नगर वाले महल के बाहर जमा होकर बोले कि अलादीन ने हमेशा उनकी मदद की है। सुल्तान ने उसे चालीस दिन दिए।

तीन दिन वह बिना खाए और सोए खोजता रहा। दुख में हाथ जुड़े तो पुरानी अंगूठी रगड़ गई।

अंगूठी वाला जिन्न आया। वह बत्ती के शक्तिशाली जिन्न का काम नहीं बदल सकता था, मगर अलादीन को आसमान के रास्ते अफ़्रीका ले गया। वह बदरुलबदूर की खिड़की के पास उतरा।

राजकुमारी ने उसे अंदर खींचा और बताया कि जादूगर बत्ती कहाँ रखता है। दोनों ने योजना बनाई। वह दावत के कपड़े पहनकर मुस्कराई और ऐसा दिखाया जैसे अफ़्रीका में रहना मान लिया हो।

“चीन को विदा कहने के लिए जाम पिएँ,” उसने कहा।

दासी ने जादूगर के प्याले में तेज़ नींद वाला चूरा मिला दिया था। बदरुलबदूर ने हँसते हुए एक बार, फिर दूसरी बार प्याले बदले। उसे खुश करने के लिए जादूगर ने सब पी लिया और गहरी नींद में गिर गया।

अलादीन अंदर आया, उसके कपड़ों से बत्ती निकाली और रगड़ी।

सुबह से पहले पूरा महल तारों में उड़ रहा था। बिस्तर, फव्वारे, रसोई और छत के बहुत उलझे कबूतर भी चीन लौटे।

सुल्तान ने आँख खोली तो चौबीस चमकती खिड़कियाँ फिर पास थीं। बदरुलबदूर मखमली रास्ते पर दौड़कर पिता से मिली। अलादीन ने बत्ती ऐसी जगह बंद की, जहाँ कोई हँसता व्यापारी न पहुँच सके।