चीं-चीं और आइसक्रीम का राज़

चीं-चीं और आइसक्रीम का राज़


मम्मी-पापा चीं-चीं को आम की आइसक्रीम का एक स्कूप दिलाते हैं — पर जब वे नहीं देख रहे होते, वह चुपके से और भी बहुत सारी खा लेती है, और आखिर में उसे सिर दर्द, पेट दर्द, और एक ऐसा नारंगी राज़ मिलता है जिसे वह छुपा नहीं पाती।

गर्मी की सबसे तपती दोपहर में मोती हाथी बरगद के नीचे लकड़ी का बड़ा मटका लाया।

“आम की आइसक्रीम!” उसने ऐलान किया।

हर जानवर को पत्ते की कटोरी में एक स्कूप मिला। मम्मी ने चम्मच उठाया भी नहीं था कि चीं-चीं अपनी आइसक्रीम चट कर गई।

“एक और?” उसने पूछा।

“अभी नहीं,” पापा बोले। “नन्ही चिड़िया के लिए इतना काफी है।”

बड़े लोग आलू जैसी दिखने वाली बदली पर बातें करने लगे। चीं-चीं ने देखा कि मटके का ढक्कन थोड़ा खुला है। सुनहरी बूँद किनारे से बह रही थी।

वह दबे पंख पीछे पहुँची।

एक चोरी की चाट के बाद उसने चोंच भर ली। फिर एक स्कूप, फिर दूसरा। थोड़ी देर में चीं-चीं मटके के अंदर थी और केवल उसकी पूँछ बाहर दिख रही थी।

“वाह!” अंदर से आवाज आई।

तभी उसके माथे में बर्फ जैसा दर्द दौड़ा।

चीं-चीं उछली, पीछे की ओर फड़फड़ाई और खाली कोन वाली टोकरी में जा गिरी। चोंच से पंजों तक नारंगी आइसक्रीम लगी थी।

मम्मी ने ढक्कन उठाया। “चीं-चीं कहाँ गई?”

नारंगी चिड़िया चुप बैठी रही।

पापा ने मटके के पास चिपचिपे निशान देखे। “ये पंजे बिल्कुल चीं-चीं जितने हैं।”

मोती टोकरी के पास झुका। “और यह टोकरी हिचकी ले रही है।”

“हिक!” चीं-चीं बोली।

वह बाहर आई और सब बता दिया। किसी के बोलने से पहले उसके पेट ने ऐसी आवाज की जैसे मेंढक सीढ़ियों पर लुढ़क गया हो।

मोती ने उसे गुनगुना पानी दिया और छाँव में लिटाया। “एक बार मैंने पूरा मटका अकेले खत्म करना चाहा था,” वह बोला।

“कर लिया?”

“मटका जीत गया।”

चीं-चीं पत्ते के बिस्तर से पिकनिक देखती रही। पिप बत्तख ने आम के छिलकों की नाव-दौड़ कराई, मगर चीं-चीं का पेट खेलने लायक नहीं था। टुकु की नाव गोल-गोल घूमी। पिप की डूब गई। एक भृंग बिना जाने जीत गया।

शाम तक चीं-चीं ठीक हुई। उसने कपड़ा लिया और मोती के साथ मटके से टोकरी तक के चिपचिपे निशान साफ किए।

सीने पर नारंगी रंग का छोटा धब्बा रह गया।

“यादगार,” मोती हँसा।

घर पर पापा ने सब्ज़ियों का सूप दिया। कटोरे में गोल गाजर तैर रही थी।

चीं-चीं ने उसे देखा। गाजर ने चीं-चीं को देखा।

मम्मी ने पूछा, “और चाहिए?”

चीं-चीं ने दोनों पंखों से कटोरा ढक लिया। “पहले मटका छिपा दीजिए।”