बर्फ ने सारी घास ढक दी। हिरन जमी मिट्टी खुरचकर हरी पत्ती खोजते। गोबो नहीं लौटा। आंट ईना हर सरसराहट पर कान खड़े करती और फलीन चुप रहने लगी।
एक बहुत ठंडी सुबह लोग जंगल में चारों ओर से आए। कुत्ते भौंके। तीतर हवा में उड़े। बैंबी माँ के साथ बर्फ में दौड़ा।
पीछे भयानक धमाका हुआ।
“दौड़ते रहो!” माँ ने पुकारा।
बैंबी झाड़ी तक अकेला पहुँचा। वह रात भर और अगले दिन तक इंतज़ार करता रहा। आखिर बूढ़ा हिरन आया।
“तुम्हारी माँ अब नहीं आएगी,” उसने धीरे से कहा। “मेरे साथ चलो।”
बूढ़े हिरन ने बर्फ के नीचे पत्तियाँ खोजना और बिना आसान निशान छोड़े रास्ता पार करना सिखाया। वसंत तक बैंबी के पहले सींग निकलने लगे।
साल बीते। वह जवान हिरन बना और फलीन फिर मिली। कारुस और रॉन्नो नाम के दो ताकतवर हिरनों ने उसे ललकारा। पेड़ों के नीचे सींग टकराए। बैंबी तेज़ और मजबूत था। दोनों पीछे हट गए और फलीन उसके साथ रहने लगी।
तभी गले में काली पट्टी पहना एक हिरन झाड़ियों से निकला।
वह गोबो था।
उसने बताया कि एक आदमी उसे बर्फ से उठाकर गरम घर ले गया और पूरी सर्दी खाना दिया। “वह मुझसे प्यार करता है,” गोबो गर्व से बोला। “मुझे उससे डरने की जरूरत नहीं।”
बूढ़ा हिरन आया और उसके गले का पट्टा देखा।
“बेचारा,” उसने कहा और चला गया।
गोबो हँसा। एक साफ सुबह जेज़ खतरे की आवाज़ लगा रहे थे, फिर भी वह खुले मैदान में चला गया।
धमाका हुआ।
गोबो गिर गया। जिसने कभी उसकी देखभाल की थी, वह उसे दूसरे हिरनों से पहचान नहीं पाया।
बैंबी और फलीन छिपे काँपते रहे। अब बैंबी बूढ़े हिरन की उदास बात समझा। गरम घर में रहते हुए गोबो जंगल की बोली भूल गया था—और जंगल उसकी जगह उसे याद नहीं रख सकता था।
कहानी समाप्त
