जवान हिरन

जवान हिरन


बूढ़ा हिरन घायल बैंबी को बचाता है, आदमी की सीमा दिखाता है और जंगल के गहरे रास्ते उसकी देखभाल में छोड़ता है।

बैंबी बूढ़े हिरन के साथ ज्यादा रहने लगा। उसने पगडंडी पर छिपे फंदे दिखाए और एक बार सींग से दोस्त खरगोश के गले की तार काट दी।

“वह चला जाए, तब भी खतरा छोड़ सकता है,” बूढ़ा हिरन बोला।

पतझड़ की सुबह पेड़ों के बीच फलीन जैसी आवाज़ आई।

“आओ, बैंबी। आओ।”

वह दौड़ने वाला था, मगर बूढ़े हिरन ने रोक लिया। दोनों हवा की दूसरी ओर से चुपचाप गए। बैंबी ने एक आदमी को पेड़ के पास छिपा देखा। वही फलीन की आवाज़ निकाल रहा था। दोनों बिना दिखे लौट गए।

सर्दी में बड़े शिकार के बीच गोली बैंबी के कंधे पर लगी। वह गिरा, मगर बूढ़े हिरन ने खड़ा किया।

“यहाँ मत लेटो। मेरे पीछे आओ।”

वह बैंबी को बड़े गोल रास्तों पर ले गया। वे अपने खून वाले रास्ते को बार-बार काटते रहे, जब तक शिकारी और कुत्ता गलत ओर नहीं चले गए। उसने कड़वी पत्तियाँ खोजीं जिनसे खून रुकने लगा, फिर उसे छिपी जगह तक ले गया।

वहाँ बैंबी ठीक हुआ। अगले वसंत तक वह भी उतनी ही चुपचाप चलने लगा।

एक दिन बूढ़े हिरन ने जंगल में हादसे से मरा आदमी दिखाया। “देख रहे हो? वह सबसे ताकतवर नहीं है। हम सबके ऊपर कोई और है।”

कुछ समय बाद बूढ़ा हिरन कमजोर हुआ। वह बैंबी को अपने सबसे गहरे ठिकाने तक ले गया। “अब मेरे पीछे मत आना। मेरा समय पूरा हुआ।” दोनों चुप खड़े रहे, फिर बैंबी लौट गया।

मौसम बदलते रहे। बैंबी अब उसी जंगल में अकेला रहता था। एक सुबह दो जुड़वाँ बच्चे रास्ते के पास काँपते मिले। उसने उन्हें उनकी माँ की ओर भेजा।

छोटा नर हिरन उसे बड़ी आँखों से देखता रहा, जैसे बैंबी कभी बूढ़े राजकुमार को देखा करता था।

बैंबी पेड़ों के बीच चला गया। उसके सींग पत्तों से छुए, मगर कदमों की कोई आवाज़ नहीं हुई।


कहानी समाप्त