रानी का क्रोकेट-मैदान

रानी का क्रोकेट-मैदान


ऐलिस अब तक के सबसे अजीब क्रोकेट खेल में हिस्सा लेती है — ज़िंदा साही, ज़िंदा राजहंस, और एक रानी जो हर मिनट 'सिर क़लम करो!' चिल्लाती है — और फिर सुनती है मॉक टर्टल की उदास, बेतुकी कहानी।

रानी के क्रोकेट में न सीधी मेहराब थी, न गोल गेंद और लगभग कोई नियम नहीं। पत्ते वाले सैनिक झुककर दरवाज़े बने थे। काँटेदार जंतु खुलकर भाग जाते। राजहंस वाली छड़ें गर्दन मोड़कर एलिस को देखतीं।

सब एक साथ खेले। रानी हर खिलाड़ी से झगड़ी और हर मिनट किसी नया सिर काटने को कहा। पीछे राजा चुपके से सबको माफ़ करता रहा, इसलिए जल्लाद के पास कोई बचा ही नहीं।

चेशर बिल्ली की मुस्कान एलिस के ऊपर आई। एलिस खेल की शिकायत कर रही थी कि रानी ने बिल्ली देख ली।

“इसका सिर काटो!”

जल्लाद बोला, बिना शरीर वाले सिर को काट नहीं सकते। राजा बोला, जिसका सिर है उसका सिर कट सकता है। बिल्ली की मालकिन डचेस को बुलाया गया, मगर उसके आने से पहले मुस्कान गायब हो गई।

रानी फिर खेलने गई और ग्रिफ़िन से एलिस को नकली कछुए के पास ले जाने को कहा।

“नकली कछुआ क्या है?” एलिस ने पूछा।

“जिससे नकली कछुए का सूप बनता है,” रानी बोली। इससे कुछ समझ नहीं आया।

पत्थरीले किनारे पर कछुए के शरीर और बछड़े के सिर वाला बहुत उदास जीव बैठा था। वह इतनी लंबी साँस लेता कि उसके पैर हिलते।

उसने समुद्र के नीचे वाले स्कूल की बात बताई। शिक्षक बूढ़ा कछुआ था। वहाँ पढ़ना-लिखना नहीं, घूमना-मुड़ना पढ़ाते थे। गणित में जोड़-घटाव की जगह इच्छा, ध्यान-भटकना, बदसूरत बनाना और मज़ाक था।

“कितने घंटे पढ़ते थे?” एलिस ने पूछा।

“पहले दिन दस, फिर नौ, फिर आठ।”

“इसीलिए तो पाठ हर दिन घटते हैं,” ग्रिफ़िन बोला।

एलिस को यह अपने स्कूल से अच्छा इंतज़ाम लगा।

दोनों ने उसके रोमांच सुने। एलिस ने कविता सुनाई, मगर शब्द फिर उलटे निकले। फिर नकली कछुए ने झींगा वाला नाच दिखाने की बात कही।

वह और ग्रिफ़िन एलिस के चारों ओर नाचे और समुद्र में झींगे फेंकने का नाटक किया। कछुआ सुंदर सूप वाला उदास गीत शुरू ही कर रहा था कि बाग में आवाज़ गूँजी:

“मुकदमा शुरू हो रहा है!”

ग्रिफ़िन ने एलिस का हाथ पकड़ा और दोनों अदालत की ओर भागे।