तार्ट्स किसने चुराए?

तार्ट्स किसने चुराए?


गुलाम के मुक़दमे में ऐलिस अपने असली आकार में वापस आती है, ग़ुस्सैल रानी के सामने डटकर खड़ी होती है, और आख़िर में जागकर पाती है कि यह तो बस एक सपना था, नदी किनारे देखा हुआ।

दिल वाले राजा और रानी भरी अदालत में सिंहासन पर बैठे थे। गुलाम जंजीरों में खड़ा था। सामने टार्ट्स की थाली थी, जिसकी खुशबू सबूत बनने के लिए बहुत अच्छी थी।

सफ़ेद खरगोश ने तुरही बजाकर आरोप पढ़ा—गुलाम ने रानी के टार्ट्स चुराए।

पहले हैटर को बुलाया गया। वह चाय का कप और मक्खन वाली रोटी लेकर आया, क्योंकि उसकी चाय कभी खत्म नहीं होती थी। राजा ने पूछा कि चाय कब शुरू की। हैटर भूल गया। रानी ने ऐसे घूरा कि उसके जूते काँपने लगे।

“जा सकते हो,” राजा बोला।

हैटर जूते पहने बिना भाग गया।

रसोइया बोली कि टार्ट्स में सबसे ज़्यादा काली मिर्च होती है। डॉरमाउस ने कहा, चाशनी होती है। जल्द सब बहस करने लगे और रसोइया गायब हो गई।

“एलिस!” सफ़ेद खरगोश ने पुकारा।

एलिस उछलकर उठी और भूल गई कि वह फिर बड़ी हो रही थी। उसकी स्कर्ट से जूरी का डिब्बा उलट गया। बारह जानवर भीड़ पर गिरे। उसने जल्दी से सबको पहले उलटा और फिर सीधा बैठाया।

राजा ने पूछा कि वह क्या जानती है।

“कुछ नहीं।”

“बिल्कुल कुछ नहीं?”

“बिल्कुल कुछ नहीं।”

सफ़ेद खरगोश को टार्ट्स के पास मिली कविता दी गई। उसमें किसी का नाम नहीं था और कुछ साबित नहीं होता था। फिर भी राजा ने उसे सबसे बड़ा सबूत कहा।

“पहले सज़ा—फ़ैसला बाद में!” रानी चिल्लाई।

“बकवास!” अब सही आकार की एलिस बोली। “तुम सब केवल ताश के पत्ते हो!”

पूरा गड्डी उसकी ओर उड़ा। एलिस चिल्लाकर उन्हें हटाने लगी।

तभी उसकी आँख खुली।

वह बहन की गोद में सिर रखकर नदी किनारे लेटी थी। चेहरे पर ताश नहीं, सूखे पत्ते गिर रहे थे। एलिस ने सफ़ेद खरगोश, कैटरपिलर, पागल चाय, क्रोकेट और अदालत की बात सुनाई, फिर चाय पीने घर भागी।

बहन पेड़ के नीचे बैठी वंडरलैंड का सपना देखती रही। कप खनके, रानी चिल्लाई, ग्रिफ़िन रोया और उनके बीच एलिस की चमकीली आवाज़ आई। उसने सोचा, बड़ी होकर एलिस यही अजीब कहानी दूसरे बच्चों को सुनाएगी।

नदी धीरे बोली। दूर भेड़ों की घंटियाँ बजीं। एक शांत पल के लिए साधारण दोपहर में एलिस की देखी हर नामुमकिन चीज़ मौजूद थी।