“यहाँ बहुत जगह है,” एलिस बोली और चाय की मेज़ वाली बड़ी कुर्सी पर बैठ गई।
मार्च खरगोश ने उसे वाइन देने की बात की, मगर वाइन थी ही नहीं। एलिस ने इसे बदतमीज़ी कहा। खरगोश बोला, बिना बुलाए बैठना भी बदतमीज़ी है। हैटर ने पूछा, कौआ लिखने की मेज़ जैसा क्यों होता है?
एलिस पहेली सोचती रही।
“मुझे खुद ज़रा भी पता नहीं,” हैटर बोला।
उनके बीच डॉरमाउस सो रहा था और कभी-कभी जागकर कुछ बोलता। हैटर ने बताया कि समय से उसकी लड़ाई हो गई है। अब घड़ी हमेशा छह बजाती है, इसलिए हमेशा चाय का समय रहता है। कप गंदे होते ही सब अगली कुर्सी पर चले जाते हैं।
उन्होंने डॉरमाउस को जगाकर कहानी माँगी। उसने चाशनी के कुएँ में रहने वाली तीन बहनों का किस्सा सुनाया, जो म अक्षर वाली चीज़ें बनाना सीखती थीं। एलिस हर सवाल पूछती और कहानी और बेकार हो जाती।
हैटर ने उसे चुप रहने को कहा तो एलिस चली गई। पीछे दोनों डॉरमाउस को चायदानी में डालने की कोशिश कर रहे थे।
“सबसे बेवकूफ़ चाय-पार्टी थी,” एलिस बोली।
जंगल में पेड़ का दरवाज़ा उसे फिर बंद दरवाज़ों वाले कमरे में ले गया। अब उसके पास सोने की चाबी और मशरूम दोनों थे। सही आकार बनकर वह सुंदर बाग में पहुँची।
पत्तों जैसे तीन माली सफ़ेद गुलाबों पर लाल रंग लगा रहे थे। उन्होंने गलत रंग के पौधे लगाए थे और दिल वाली रानी से डरते थे।
बड़ा जुलूस आया—सैनिक, दरबारी, शाही बच्चे, सफ़ेद खरगोश, गुलाम, राजा और रानी।
रानी ने एलिस को देखा।
“यह कौन है?”
एलिस ने नाम बताया। फिर रानी ने काँपते माली देखे।
“इनके सिर काट दो!” वह चिल्लाई।
सैनिक उन्हें ले गए, मगर एलिस ने चुपके से गमले में छिपा दिया।
रानी फिर एलिस की ओर मुड़ी। “क्रोकेट खेलती हो?”
“हाँ,” एलिस बोली।
“तो चलो!”
सब पीछे दौड़े। एलिस सोचती रही कि राजहंस से गेंद कैसे मारेंगे, काँटेदार जंतु को गेंद कैसे बनाएँगे—और इस रानी के पास किसी का सिर कितनी देर बचता होगा।
