अली बाबा और चालीस चोर: मोर्जियाना की चतुर आँखें

अली बाबा और चालीस चोर: मोर्जियाना की चतुर आँखें


मोर्जियाना चोरों के सफ़ेद और लाल निशान हर दरवाज़े पर बना देती है। फिर नकली तेल वाले के मटकों में उसे एक के बाद एक सैंतीस धीमी आवाज़ें सुनाई देती हैं।

चोर ने अली बाबा के दरवाज़े पर सफ़ेद खड़िया लगाई। बाज़ार जाते समय मोर्जियाना ने निशान देखा। उसे मतलब नहीं पता था, इसलिए उसने गली के हर दरवाज़े पर वैसा ही निशान बना दिया।

रात को सरदार सही घर खोजने आया। सड़क के दोनों ओर सफ़ेद निशान थे।

दूसरे चोर ने लाल खड़िया लगाई। मोर्जियाना ने वह भी हर दरवाज़े पर बना दी। आखिर सरदार खुद आया। उसने कोई निशान नहीं बनाया। घर की खिड़कियाँ, सीढ़ियाँ और मोड़ ध्यान से याद किए।

फिर उसने अलग तरह की मुलाक़ात की तैयारी की।

चोरों का सरदार तेल का व्यापारी बन गया। उन्नीस खच्चरों पर अड़तीस चमड़े के मटके अली बाबा के घर आए। एक में तेल था। बाकी हर मटके में एक चोर छिपा था।

“रात हो गई है,” नकली व्यापारी बोला। “क्या मेरे खच्चर आँगन में रह सकते हैं?”

अली बाबा ने उसे खाना और कमरा दिया। सोने से पहले सरदार मटकों के पास गया।

“ढक्कन पर कंकड़ सुनो तो बाहर आना,” उसने धीरे से कहा।

बाद में मोर्जियाना की रसोई के दीये का तेल खत्म हुआ। नौकर ने व्यापारी के मटके से लेने को कहा।

उसने पहला ढक्कन उठाया।

“समय हो गया?” भीतर आवाज़ आई।

मोर्जियाना का हाथ नहीं काँपा। उसने सरदार जैसी भारी आवाज़ बनाकर कहा, “अभी नहीं।”

वह एक-एक मटके के पास गई। हर बार छिपा चोर मिला। केवल आख़िरी में तेल था।

मोर्जियाना ने तेल भाप आने तक गरम किया। चुपचाप हर चोर वाले मटके में थोड़ा डाला। कोई बाहर आने लायक नहीं बचा। फिर दीया बुझाकर खिड़की से देखने लगी।

आधी रात सरदार आया। उसने ढक्कनों पर कंकड़ मारे।

टप। टप। टप।

कोई ढक्कन नहीं हिला।

एक मटका, फिर दूसरा खोलकर उसने समझा कि योजना बिगड़ गई। घोड़ा और जूते छोड़े, बाग की दीवार पार की और भाग गया।

सुबह मोर्जियाना ने अली बाबा को मटके दिखाए। अब उसे सफ़ेद-लाल निशान और रात में आए तेल वाले की बात समझ आई।

दोनों ने चोरों को बाग से दूर छिपाकर दफ़न किया और खच्चर अलग बाज़ारों में बेचे। अली बाबा इनाम देना चाहता था, मगर मोर्जियाना ने सावधान रहने को कहा।

“सरदार बचा है,” वह बोली। “पूँछ के बिना साँप भी काट सकता है।”

एक साल कुछ नहीं हुआ।

फिर कोजिया हुसैन नाम के व्यापारी ने अली बाबा के बेटे की दुकान के सामने कपड़े की दुकान खोली। वह सस्ता माल, अच्छी दावत और मीठी बातें देता था। बस नमक वाला खाना नहीं खाता था।

अली बाबा के बेटे को नया दोस्त पसंद आया और उसने घर बुलाया।

मोर्जियाना ने अनजान दाढ़ी के ऊपर आँखें देखीं तो चोरों का सरदार पहचान लिया। उसके कपड़े के नीचे छिपे छुरे का सिरा भी दिख गया।