अली बाबा और चालीस चोर: तेल के मटके

अली बाबा और चालीस चोर: तेल के मटके


मोर्जियाना व्यापारी की नकली दाढ़ी के पीछे भागा हुआ सरदार पहचान लेती है। खाने के बाद उसका नाच आख़िरी जाल बनता है और बाद में खाली मटके में नींबू का पेड़ उगता है।

मोर्जियाना ने देखी बात किसी को नहीं बताई। वह खाना देती रही। कोजिया हुसैन नमक से बचता और अली बाबा को देखकर मुस्कराता रहा।

खाना हटने के बाद मोर्जियाना नाच वाले कपड़ों में आई। हाथ में बजता डफ और कमर पर चाँदी का छुरा था। दूसरा नौकर बाँसुरी बजाता और वह दीयों के बीच घूमती।

नकली व्यापारी ध्यान से देख रहा था। अली बाबा खुशी से ताली बजाता रहा।

नाच के आखिर में मोर्जियाना ने छुरा निकाला। पहले मज़ाक में अपनी ओर, फिर अली बाबा और उसके बेटे की ओर किया। फिर मेहमान के सामने घूमी।

कोजिया हुसैन ने कपड़ों में हाथ डाला।

मोर्जियाना पहले हिली। उसका छिपा हथियार कमरे में दूर गिराया और अपना छुरा उसकी छाती के पास रोक दिया। नौकरों ने उसे पकड़ लिया।

“क्या कर रही हो?” अली बाबा चिल्लाया।

मोर्जियाना ने नकली दाढ़ी खींच दी।

“यही तेल वाला है, जिसके मटकों में सैंतीस चोर थे। यह उनका सरदार है।”

पहरे में उसने सब मान लिया। उसके पकड़े जाने पर चालीस में से कोई चोर घर को नुकसान पहुँचाने के लिए नहीं बचा।

अली बाबा ने सरदार और मोर्जियाना को देखा। उसने खड़िया के निशान देखे, मटके खोजे और भेस पहचान लिया था। बाकी सबको वे मामूली बातें लगी थीं।

“तुमने हमें तीन बार बचाया,” अली बाबा बोला। “आज से तुम आज़ाद हो और यह घर हमेशा तुम्हारा है।”

बाद में मोर्जियाना ने अली बाबा के बेटे से शादी की। उसे लगा, खतरे के कोट उतारने से पहले पहचान लेने वाली पत्नी होना अच्छा है।

कई महीने अली बाबा गुफा नहीं गया। आख़िर अकेला घोड़े पर पहुँचा और पेड़ों में रुककर सुना। कोई सवार नहीं आया। रास्ते पर घास उग गई थी।

“खुल जा, सिमसिम!”

खज़ाना भीतर था। अली बाबा ने केवल परिवार की ज़रूरत भर लिया। नगर में खुलकर मदद की, ईमानदारी से व्यापार बढ़ाया और बेटे के अलावा किसी को गुफा नहीं बताई।

सालों बाद मोर्जियाना ने आँगन में एक खाली तेल के मटके में नींबू का पेड़ लगाया। डालियाँ बाहर आईं और पीले फल लगे।

मेहमान अजीब गमला देखते, मगर कोई नहीं जानता था कि कभी ऐसी ही चीज़ के भीतर से अँधेरी रात में धीमा सवाल आया था:

“समय हो गया?”