सोया हुआ कछुआ-द्वीप

सोया हुआ कछुआ-द्वीप


कलिंग और तारा जिस टापू पर पानी लेने उतरते हैं, वह असल में सोता हुआ बड़ा कछुआ कूर्म-राज है। उसके फिर से सोने से पहले उन्हें तीन पूरी पहेलियाँ बुझानी हैं। आखिरी पहेली उसकी हिलती पीठ पर काई के नीचे छिपी है।

शिमरिंग समंदर में तीसरे दिन सन-स्किमर के पानी के पीपे ने आखिरी बार छप-छप की।

“आधा कप पानी बचा है,” कलिंग बोला।

“बहुत है,” तारा ने कहा। “तुम पानी पी लेना। मैं कप का हैंडल पी लूँगी।”

सामने हरा टापू दिखा। उस पर पेड़ थे और एक छोटा झरना बह रहा था। दोनों खाली पीपे लेकर वहाँ पहुँचे।

उनके पैरों के नीचे जमीन ऊपर उठी।

फिर दोबारा उठी।

अचानक पूरे टापू ने इतनी जोर से खर्राटा लिया कि छह ताड़ के पेड़ झुक गए। उनके पास एक बहुत बड़ी सुनहरी आँख खुली।

“मैं कूर्म-राज हूँ,” टापू जितना बड़ा कछुआ बोला। “मेरे सोने से पहले तीन पहेलियाँ बुझा लो। फिर जितना चाहो पानी ले जाना।”

“हमारे पास कितना समय है?” तारा ने पूछा।

कूर्म-राज ने जम्हाई ली। उसके मुँह से चिड़ियों का पूरा झुंड बाहर निकल गया।

“बहुत कम,” कलिंग बोला।

पहली पहेली आई:

“मेरे अंदर शहर हैं, पर घर नहीं। जंगल हैं, पर पेड़ नहीं। समंदर हैं, पर मछलियाँ नहीं। मैं क्या हूँ?”

कलिंग ने कम्पास में रखे चमकीले टुकड़ों को देखा। “नक्शा!”

एक पतली धारा बहने लगी।

दूसरी पहेली आई:

“मेरा बिस्तर है, पर मैं सोती नहीं। मेरा मुँह है, पर मैं खाती नहीं। पैर नहीं, फिर भी दौड़ती हूँ। मैं क्या हूँ?”

तारा ने बहती धारा देखी। “नदी!”

दूसरा झरना खुल गया।

“तीसरी पहेली?” कलिंग चिल्लाया।

कूर्म-राज खर्राटे लेने लगा था।

तारा उसकी पीठ पर चढ़ी। साँस के साथ काई इधर-उधर हो रही थी और नीचे सुनहरे शब्द दिख रहे थे। कलिंग दूसरी ओर दौड़ा। आधी पहेली उसे दिख रही थी, आधी तारा को। दोनों ने बारी-बारी पढ़ा:

“पैर नहीं, फिर भी नाचती हूँ—”

“मुँह नहीं, फिर भी गरजती हूँ—”

“रात को लकड़ी खाती हूँ—”

“पानी आते ही गायब हो जाती हूँ!”

दोनों एक साथ बोले, “आग!”

कूर्म-राज की आँखें खुल गईं। तीनों झरने पूरे जोर से बहने लगे। नक्शे का तीसरा टुकड़ा उछलकर तारा के पीपे में गिरा।

पीपे भर गए, लेकिन नीचे उतरने से पहले कूर्म-राज फिर सो गया। उसकी पीठ एक ओर झुकी। दोनों बच्चे, सारे पीपे और उनकी छोटी नाव झरने पर फिसलते हुए सीधे समंदर में जा गिरे।

कलिंग ऊपर आया तो उसके सिर पर कमल का पत्ता था।

टापू से फिर खर्राटा सुनाई दिया।

तारा हँसी। “शायद उसने बाय-बाय कहा है।”