एलिस अपने आँसुओं में तैर रही थी। पास एक चूहा भी हाथ-पैर चला रहा था।
“बाहर का रास्ता जानते हो?” उसने पूछा। “शायद फ़्रेंच समझते हो—मेरी बिल्ली कहाँ है?”
बिल्ली सुनते ही चूहा डरकर दूर गया। एलिस ने माफ़ी माँगी और डायना का नाम न लेने की बात कही—फिर तुरंत बताने लगी कि डायना चूहे पकड़ने में कितनी अच्छी है।
जल्द तालाब में बत्तख, डोडो, तोता, नन्हा बाज़ और कई जानवर भर गए। भीगे पंखों में सब अजीब लग रहे थे। वे किसी तरह किनारे पहुँचे।
चूहे ने उन्हें सुखाने के लिए बहुत उबाऊ इतिहास सुनाया। कोई नहीं सूखा।
“घेरा-दौड़ होगी!” डोडो ने कहा।
उसने बिना शुरुआत वाली टेढ़ी राह बनाई। सब जब चाहे दौड़े और जब चाहे रुके। आधे घंटे बाद डोडो चिल्लाया, “दौड़ खत्म!”
“जीता कौन?”
बहुत सोचकर डोडो बोला, “सब जीते और सबको इनाम मिलेगा।”
एलिस ने जेब की मिठाइयाँ बाँटी। हर जीव को एक मिली। एलिस का इनाम उसकी अपनी अंगुश्ताना थी, जिसे डोडो ने बहुत गंभीर होकर उसे लौटाया।
चूहे ने बिल्ली और कुत्तों से नफ़रत का किस्सा शुरू किया। एलिस को “किस्सा” सुनते हुए उसकी लंबी पूँछ कविता जैसी मुड़ती दिखी। उसने ध्यान छोड़ा तो नाराज़ चूहा चला गया।
एलिस ने फिर डायना का नाम लिया। सारे पक्षियों को अचानक ज़रूरी काम याद आ गए और वे उड़ गए।
तभी सफ़ेद खरगोश अपने पंखे और दस्ताने खोजता आया। उसने एलिस को अपनी नौकरानी समझ लिया।
“मेरी ऐन! घर से सामान लाओ!”
हैरान एलिस बात मान गई। खरगोश के छोटे घर में दस्ताने, पंखा और बिना नाम वाली बोतल मिली।
“यहाँ कुछ खाने-पीने पर हमेशा मज़ेदार बात होती है,” उसने कहा।
एक घूँट लेते ही सिर छत से लगा, बाँह खिड़की से बाहर गई और पैर चिमनी में फँस गया।
बाहर खरगोश बिल नाम के छिपकली को पुकारने लगा।
